कला जब भावनाओं से आगे बढ़कर समर्पण बन जाए, तो वह सिर्फ एक चित्र नहीं रहती—वह संदेश बन जाती है। कुछ ऐसा हीकर दिखाया है रोमा गुप्ता ने, जिन्होंने देश के चर्चित शिक्षक Khan Sir के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए अपनी ही नसों से खून निकालकर उनकी तस्वीर बनाई। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर शिक्षण जगत तक में चर्चा का विषयबन गई!
सम्मान की अनोखी अभिव्यक्ति
रोमा गुप्ता का कहना है कि यह किसी प्रकार की सनसनी या कला–प्रदर्शन नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता का भाव है।खान सर ने वर्षों से लाखों विद्यार्थियों को निःशुल्क और सुलभ शिक्षा देकर नई दिशा दिखाई है। उसी प्रेरणा को जीवंत करने केलिए उन्होंने यह असाधारण कदम उठाया।
कैसे बनी तस्वीर
सूत्रों के मुताबिक, रोमा गुप्ता ने चिकित्सकीय सावधानी के साथ सीमित मात्रा में रक्त निकालकर विशेष कागज़ परपेन–स्ट्रोक तकनीक से चित्र उकेरा। पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा का ध्यान रखा गया। तैयार तस्वीर में खान सर का चेहरा स्पष्ट, संतुलित और भावपूर्ण दिखाई देता है—मानो हर रेखा में श्रद्धा बोल रही हो।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
तस्वीर सामने आते ही लोगों की प्रतिक्रियाएँ बंटी हुई रहीं।
- एक वर्ग ने इसे अतुलनीय समर्पण बताया।
- वहीं कुछ लोगों ने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
हालाँकि, अधिकांश प्रतिक्रियाएँ इस बात पर एकमत दिखीं कि भावना सच्ची है और संदेश गहरा।
खान सर की शिक्षण विरासत
खान सर अपनी सरल भाषा, देशज उदाहरणों और निःस्वार्थ पढ़ाने के अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं कीतैयारी करने वाले लाखों छात्र उन्हें मार्गदर्शक मानते हैं। रोमा गुप्ता की यह पहल उसी विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक मानीजा रही है।
कला या कृतज्ञता?
इस पूरी घटना पर सबसे प्रभावशाली पंक्ति वही है जो तस्वीर के साथ उभरकर आती है—
“यह कला नहीं, सम्मान है।”
यह वाक्य बताता है कि कभी–कभी अभिव्यक्ति का माध्यम असामान्य हो सकता है, लेकिन भावना अगर शुद्ध हो, तो उसकाअसर दूर तक जाता है।








