सारण जिले के रिवीलगंज प्रखंड अंतर्गत मुकरेड़ा गांव से सामाजिक बदलाव की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि शोक के समय दिखावे और फिजूल खर्च के बजाय पीड़ित परिवार को सहारा और सम्मान देना अधिक जरूरी है।
गांव के लोगों का मानना है कि मृत्यु भोज जैसी परंपराएं समाज पर आर्थिक बोझ बन चुकी हैं, जिससे कई परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस कुप्रथा को समाप्त करना समय की बड़ी आवश्यकता है।
इस निर्णय को सफल बनाने में गांव के बुजुर्गों और युवाओं की अहम भूमिका रही। बैठक में कपिलेश्वर सिंह, राजू सिंह, पप्पू सिंह, जितेंद्र सिंह, राजदेव सिंह, बबन सिंह, शंकर सिंह, अखिलेश्वर सिंह, पशुपति सिंह, पताली सिंह, चंद्रभूषण सिंह, मनोज सिंह, अमरिंदर सिंह, उप मुखिया रोहित सिंह, उमेश सिंह, सोनू सिंह, भोला सिंह, ललन सिंह, सत्येंद्र सिंह, गामा सिंह, नीरज सिंह, संजय सिंह, पिंटू सिंह और मिकी सिंह समेत गांव के कई सम्मानित लोग मौजूद रहे।
ग्रामीणों के इस फैसले को समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि मुकरेड़ा गांव की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और अन्य गांवों को भी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करेगी।











